हैं उजियाले तट सभी
हुआ सोहम् नाद गुंजित भेद डाले पट सभी
अंतर ओज सतह पर आया हैं उजियाले तट सभी !
सुना श्रवण ने मन तक पहुँचा डोर श्वास की थामे
बुद्धि, चित्त अहं को तज मन आत्मतत्व को जाने !
पंचभूत से निर्मित काया जड़ प्रकृति की छाया
चेतन होती आत्म तत्व से, ढके अविद्या माया
स्थूल टिका है सूक्ष्म तत्व पर जो अमिट अविनाशी
सृष्टि के पीछे छिपा जो वह चैतन्य अधिशासी !
ज्ञानदीप हुआ प्रज्ज्वलित छंट गए भ्रम सभी
अंतर ओज सतह पर आया हैं उजियाले तट सभी !
अनिता निहालानी
१८ जनवरी २०११