श्री मद् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित
विवेक – चूड़ामणि
आत्म ज्ञान का अधिकारी कौन
जो अधिकारी है ज्ञान का, फल सिद्धि उसी को सम्भव
मन में यदि जिज्ञासा उत्तम, देश, काल भी हैं सहायक
सद्गुरु श्रेष्ठ ब्रह्मज्ञानी है, शरण में उनकी जाना होगा
आत्म तत्व का जो जिज्ञासु, अहंकार मिटाना होगा
बुद्धिमान हो व विद्वान, तर्क वितर्क जिसे आता है
आत्म ज्ञान का अधिकारी भी, वह चाहे तो बन सकता है
विवेक वान, वैरागी मन का, शम, दम आदि से संयुक्त
ब्रह्म को वह ही पा सकता, जिसके भीतर जगा मुमुक्षत्व