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Monday, July 2, 2012

श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् चतुर्थ सर्ग


श्री सीतारामाचन्द्राभ्या नमः
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्
बालकाण्डम्
 



चतुर्थ सर्ग

महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण काव्य का निर्माण करके उसे लव-कुश को पढाना, मुनिमंडली में रामायण गान करके लव और कुश का प्रशंसित होना तथा अयोध्या में श्रीराम द्वारा सम्मानित हो उन दोनों का राम दरबार में रामायण गान सुनाना 


मुनि ने देखा उनकी ओर, थे सुयोग्य वे, मन में जाना
सीता के चरित्र से युक्त, आरम्भ किया काव्य पढ़ाना

‘पौलस्त्य वध’ रखा था, उसका अन्य नाम विचार   
उत्तम व्रती मुनि थे वे, वेदार्थ का किया विस्तार

पाठ-गान में मधुर काव्य यह, द्रुत, मध्य, विलम्बित भी है
सप्त स्वरों से युक्त हुआ है, सँग वीणा के गा सकते हैं

श्रृगार, करूण, हास्य, रौद्र, भयानक रस से अनुप्राणित
महाकाव्य पढ़ करते गान, लव-कुश दोनों हो हर्षित

संगीत-शास्त्र के तत्वज्ञ, गन्धर्वों सम रूप था शोभन
स्थान व मूर्छना के ज्ञाता, मधुर स्वर से थे सम्पन्न

सुंदर रूप, शुभ लक्षण, उनकी सहज सम्पत्ति थे
दूजे युगल राम ही लगते, वार्तालाप मधुर करते थे

सबकी प्रशंसा के पात्र, जिह्वाग्र किया सम्पूर्ण काव्य
ऋषियों, साधुओं के समागम में, गाते थे रामायण काव्य

एक दिन महर्षि-मंडली में, गान किया मिल दोनों ने
हो हर्षित मुनि वे बोले, है अति माधुर्य इस गान में

यह घटनाएँ पहले हुई थीं, लगती हैं प्रत्यक्ष हो रहीं
सुंदर भाव, राग युक्त गायन, श्लोकों में मधुरता भी




Wednesday, June 20, 2012

श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् चतुर्थ सर्ग


श्री सीतारामाचन्द्राभ्या नमः
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्
बालकाण्डम् 


चतुर्थ सर्ग

महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण काव्य का निर्माण करके उसे लव-कुश को पढाना, मुनिमंडली में रामायण गान करके लव और कुश का प्रशंसित होना तथा अयोध्या में श्रीराम द्वारा सम्मानित हो उन दोनों का राम दरबार में रामायण गान सुनाना

वन से लौट लिया राम ने, शासन जब अपने हाथों में
उनके चरित्र पर आधारित, रचा काव्य कवि वाल्मीकि ने

चौबीस हजार श्लोक थे जिसमें, सर्ग पांच सौ, सात कांड
विचित्र अर्थ व पद युक्त था, शामिल उत्तर व भविष्य कांड

ज्ञानी कवि ने किया विचार तब, कौन शक्तिशाली होगा
महाकाव्य को सुना सके जो, ऐसा नर कौन होगा

शुद्द अन्तकरण था जिनका, महर्षि ने जब किया विचार
चरणों में आकर झुक गए तब, लव-कुश दोनों राजकुमार

दोनों थे धर्म के ज्ञाता, स्वर था मधुर, यशस्वी थे
धारणा शक्ति अद्भुत थी उनकी, वेदों में पारंगत थे