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Tuesday, May 3, 2011

जीवन चलते-चलते बीता


जीवन चलते-चलते बीता

थके कदम दो पल सुस्ता लें
कहीं न मिलती छांव,
जीवन चलते-चलते बीता
पाया नहीं पड़ाव !

काल शिकारी घात लगाये
बैठा लेकर दांव,
कब पासा सीधा पड़ जाये
थम जाएँ कब पांव !

क्या खोया क्या पाया हमने
कोई नहीं हिसाब,
जीवन भूलभुलैया या फिर
इक जादुई किताब !

अनिता निहालानी
३ मई २०११
  

Sunday, March 27, 2011

अनकहे गीत बड़े प्यारे हैं

अनकहे गीत बड़े प्यारे हैं


जो न छंद बद्ध हुए
बिल्कुल कुंआरे हैं
तिरते अभी नभ में   
गीत बड़े प्यारे हैं !

जो न अभी हुए मुखर
अर्थ क्या धारे हैं
ले चलें जाने किधर
 पार सिंधु उतारे हैं !

पानियों में संवरते
पी रहे गंध माटी
जी रहे ताप सहते
मौन रूप धारे हैं !

गीत गाँव की व्यथा के
भूली सी इक कथा के
गूंजते से, गुनगुनाते
अंतर संवारे हैं !

गीत जो हृदय छू लें
पल में उर पीर कहें
ले चलें अपने परों  
उस लोक से पुकारें हैं !

अनिता निहालानी
२७ मार्च २०११
 

Friday, March 4, 2011

इक पल

इक पल

कितनी अद्भुत शक्ति समाये  
अनगिन भीतर भेद छिपाए
देखो, अगला पल आता है !

खो जाये न पकड़ो इसको
मन की डोर से जकड़ो इसको
देखो, पल में यह जाता है !

अनिता निहालानी
४ मार्च २०११

Sunday, January 16, 2011

ध्यान

ध्यान

चलो खुद से मिलें
सोहम् की पतवार थामे
मनसागर में दूर तक निकलें !

चलो अन्तर्पट खोलें
नयनों के द्वार बंद कर
निधियों के अम्बार से सच्चे मोती पालें !

चलो मन से बतियायें
मन जो धुला-धुला सा
निष्पाप, निर्दोष
उसे जानें
श्वासों की लय पर जो थिरका
कभी हँसा, उसे गा लें

अनिता निहालानी
१७ जनवरी २०११