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Saturday, August 18, 2012

राज मंत्रियों के गुण और नीतिका वर्णन


श्री सीतारामाचन्द्राभ्या नमः
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्
बालकाण्डम् 



सप्तमः सर्गः
राज मंत्रियों के गुण और नीतिका वर्णन 



मंत्रणा को गुप्त रखते थे, सूक्ष्म विषय का करें विचार
नीति शास्त्र का ज्ञान था उनको, प्रिय वाणी करें व्यवहार

ऐसे थे गुणवान मंत्री, राजा जिन सँग शासन करते
गुप्तचरों के द्वारा दृष्टि, शत्रु राज्यों पर थे रखते

धर्मपूर्वक पालन करते, सदा अधर्म से दूर ही रहते
तीनों लोकों में प्रसिद्धि, उदार और सत्य प्रतिज्ञ थे

नहीं मिला था कोई शत्रु, जो उनसा या बड़ा हो उनसे
मित्र बहुत थे उनके लेकिन, चरणों में भी कई थे झुकते

दूर हुए थे कंटक सारे, राज्य के उनके प्रताप से
रह अयोध्या में वह राजा, इंद्र की भांति शासन करते

सभी मंत्री रत रहते थे, राज्य के हित साधन में ही
थे अनुरक्त नरेश के प्रति, कार्यकुशल व शक्तिशाली भी

सारे जगत को करे प्रकाशित, ज्यों सूर्य रश्मियों से शोभित
उसी प्रकार घिरे रहते थे, दशरथ मंत्रियों से सज्जित

इस प्रकार श्री वाल्मीकि निर्मित आर्ष रामायण आदिकाव्य के बालकाण्ड में सातवाँ सर्ग पूरा हुआ.