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Friday, March 16, 2012

श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्


श्री सीतारामाचन्द्राभ्या नमः
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्

बालकाण्डम्
प्रथमः सर्गः
नारद जी का वाल्मीकि मुनि को संक्षेप से श्रीरामचरित्र सुनाना

तप व स्वाध्याय में रत थे, नारद मुनि श्रेष्ठ मुनियों में
उनसे पूछा प्रश्न अनोखा, वाल्मीकि तपस्वी जी ने

कौन है इस युग में मुनिवर, गुणवान और वीर पुरुष
दृढ़ प्रतिज्ञ, सत्यवक्ता, धर्मज्ञ और प्रियदर्शन

अक्रोधी, कान्तिमान, जिसका मन पर है अधिकार
हितसाधक हर इक प्राणी का, देव भी करते जिससे प्यार

हे मुनिवर यह आप कहें, आप बताने में हैं समर्थ
उत्सुक हूँ मैं मुझे बताएं, किसमें हैं यह गुण दुर्लभ