Sunday, February 20, 2011

मंदिर और शिवाला

मंदिर और शिवाला

यह तन एक मंदिर है
और मन शिवाला है
इस तन-मन में आन बसा एक नटखट ग्वाला है !

जब से वह आया
तन को महकाया,
जगमग ज्योति से
मन को चमकाया

यह तन जो दीप बना
और मन उजाला है
 इस तन-मन में छुपा हुआ एक बांसुरी वाला है !

आनंद की वर्षा की
निज प्रेम दिया उसने,
अंतर्मन भिगो दिया
नेह किया जिसने

जो दूर बसा जा के
वह गोकुल वाला है
इस तन-मन में आन बसा एक बाल गोपाला है !

अनिता निहालानी
२० फरवरी २०११

6 comments:

  1. Your blog is great你的部落格真好!!
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    Thank you!!Wang Han Pin(王翰彬)
    From Taichung,Taiwan (台灣)
    WELCOME

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  2. अति सुंदर कोमल अभिव्यक्ति -

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  3. जो दूर बसा जा के
    वह गोकुल वाला है
    इस तन-मन में आन बसा एक बाल गोपाला है !

    बहुत भक्ति से परिपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..

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  4. वाह!
    बहुत अच्छी आध्यात्मिक प्रस्तुति।

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  5. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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