Saturday, February 5, 2011

पावन गोपियों के प्रेम सम


पावन गोपियों के प्रेम सम

मन खाली है
क्या बोले !
मन खाली है
क्यों बोले !

हम जो न माटी थे न आकाश
उलझे रहे पंचभूतों के जाल में
शिकार हुए द्वन्द्वों के,
औरों को किया !

हम जो हैं शुद्ध, बुद्ध, निर्मल
सुखातीत, दुखातीत
धवल हिम शखिर से अमल
पावन गोपियों के प्रेम सम !

अनिता निहलानी
५ फरवरी २०११

4 comments:

  1. दिल तो बच्चा है न ,उसे मिटटी के खिलौने ही भाते हैं,भले ही क्षण में टूट जाता है और फिर रोता है उसके लिये.

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर रचना !

    ReplyDelete
  3. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
    या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
    http://blogworld-rajeev.blogspot.com
    SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
    या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
    http://blogworld-rajeev.blogspot.com
    SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

    ReplyDelete