Friday, December 31, 2010

भावान्जली

जिसको मैंने था प्यार किया
पाया जग में, कुछ नहीं मिला,
रह जाये सब का सभी यहीं
जो अनचाहा है वही दिला !

जीवन की बाती बुझने को
हंसके दो विदा अब न रोको
अधिकार से ज्यादा पाया है
लौटा दूँ खुशी से न टोको !

पथ बीहड़ हो या अति दुर्गम
थम जाएँ न कदमों के स्वर,
व्याकुल अंतर में प्यास लिये
बढ़ते जाना है डगर डगर !

2 comments:

  1. जीवन की असलियत को बताती पंक्तियाँ ----जिसको मैंने था प्यार किया
    पाया जग में, कुछ नहीं मिला,
    रह जाये सब का सभी यहीं
    जो अनचाहा है वही दिला !

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  2. सुन्दर रचना.....

    नव वर्ष की आपको हार्दिक सुभकामनाएँ.

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