Monday, August 6, 2012

राज मंत्रियों के गुण और नीतिका वर्णन


श्री सीतारामाचन्द्राभ्या नमः
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम्
बालकाण्डम् 

षष्टः सर्गः

राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन 


विन्ध्य और हिमाचल पर्वत, थे जिनके जन्म स्थान
बलशाली, मदमत्त गजों से, भरी हुई थी भूमि महान

ऐरावत कुल में थे उत्पन्न, महापद्म के वंशी भी थे
अंजन, वामन दिग्गजों से, प्रकटे गज पूर्णता देते

हिमालय के भद्र जाति के, विन्ध्य के मन्द्र जाति के
सह्य पर्वत के मृग जाति, सारे गज वहाँ रहते थे

इनके मेल से हुए जो संकर, पर्वताकार मदोन्मत हाथी
तीन योजन के विस्तार की, अयोध्या की उनसे शोभा थी

दो योजन भूमि ऐसी थी, युद्ध होना था जहाँ असंभव
अयोध्या यह नाम सार्थक, शासन करते थे नृप दशरथ

ज्यों शशि राजा नक्षत्रों का, महातेजस्वी राजा दशरथ
शत्रु कोई नहीं था उनका, अयोध्या था नाम सार्थक

द्वार व अर्गला दृढ़ थे, विचित्र गृहों से थी सुशोभित
भरी सहस्त्रों मनुष्यों से, इन्द्र्तुल्य राजा से शासित

इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य बालकाण्ड में छठा सर्ग पूरा हुआ

सप्तमः सर्गः

राज मंत्रियों के गुण और नीतिका वर्णन

इक्ष्वाकुवंशी वीर राजा के, आठ मंत्री थे गुण सम्पन्न
मंत्र के तत्व को जानते, बिना कहे समझते थे मन

शुद्ध आचार-विचार से युक्त, करें प्रिय, हित राजा के
यशवान थे सभी मंत्री, राज-काज में सदा सलंग्न थे

धृष्टि, जयंत, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्धन, अकोप, धर्मपाल
सुमन्त्र आठवें का नाम था, सभी जानते थे अर्थशास्त्र

ऋषियों में श्रेष्ठतम वशिष्ठ, वामदेव भी दो ऋत्विज थे
सुयज्ञ, जाबालि, कश्यप, गौतम, मार्कण्डेय, कात्यायन भी थे  


6 comments:

  1. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका हार्दिक अभिनंदन है। धन्यवाद ।

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  2. बेहतरीन, आभार।

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  3. प्रेम जी व मनोज जी आभार!

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  4. बहुत सुन्दर...आभार

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  5. मनोरम मनभावन सहज वर्रण उस दौर का .शुक्रिया .

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  6. जन्माष्टमी की शुभकामनायें!

    कृष्ण जी का आशीर्वाद सदा रहे!!

    जय श्री कृष्ण !!!

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