आज ईश सँग खेलें होली
आज ईश सँग खेलें होली
आज कान्ह सँग करें ठिठोली !
जब से तुम सँग जोड़ा नाता
रंगों का साथ है भाता
मन निर्मल इक सुर में गाता
हरपल रंगमय होता जाता !
आज भरी है अपनी झोली
आज शम्भु सँग खेलें होली !
अनुभव का गुलाल लगाया
प्रीत का अबीर बिखराया
रंग सुनहरा छिड़का तुमने
जैसे जामे खुशी पिलाया !
आज चली मस्तों की टोली
आज गुरु सँग खेलें होली !
सेवा का है रंग रुपहला
प्रभु भक्ति का रंग है नीला
रंग गुलाबी में भीगा जो
अंतर हो जायेगा पीला !
आज लगाएँ चन्दन रोली
आज श्याम सँग खेलें होली
हरा रंग बरसाया तुमने
शांति नीर बहाया तुमने
भीतर की ऊर्जा जगाई
रंग श्वेत जब पाया हमने !
आज प्रेम की मदिरा घोली
आज राम सँग खेलें होली !
नयनों से झरता अनुराग
मस्ती से खेलें हम फाग
थिरकन कदमों की यह बोले
कब से सोया अब तो जाग !
चलो बना लें सूरत भोली
आज ईश सँग खेलें होली !
अनिता निहालानी
१८ मार्च २०११